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20 लोकप्रिय उर्दू और हिंदी के शेर - Urdu Hindi Best Shayari

Discover the beauty and depth of Urdu poetry with our collection of heartwarming and thought-provoking Shayari. From romantic musings to contemplations on life, our Urdu Shayari will transport you to a world of emotions and feelings. Whether you're a fan of Ghalib, Iqbal, or Faiz, you're sure to find something that speaks to you in our extensive selection of Urdu poetry." 

Discover the beauty and depth of Urdu poetry with our collection of heartwarming and thought-provoking Shayari. From romantic musings to contemplations on life, our Urdu Shayari will transport you to a world of emotions and feelings. Whether you're a fan of Ghalib, Iqbal, or Faiz, you're sure to find something that speaks to you in our extensive selection of Urdu poetry."


तिरी जुस्तुजू में निकले तो अजब सराब देखे कभी शब को दिन कहा है कभी दिन में ख़्वाब देखे


मिरे दिल में इस तरह है तिरी आरज़ू ख़िरामाँ कोई नाज़नीं हो जैसे जो खुली किताब देखे


जिसे मेरी आरज़ू हो जो ख़राब - ए - कू-ब-कू हो मुझे देखने से पहले तुझे बे- नक़ाब देखे


जिसे कुछ नज़र न आया हो जहाँ रंग-ओ-बू में वो खिला गुलाब देखे वो तिरा शबाब देखे


दो-जहाँ को ला डुबोए वो ज़रा सी आबजू में तिरी चश्म-ए-सुर्मगीं को जो कोई पुर- आब देखे


यूँ ठहर ठहर के गुज़री शब-ए-इंतिज़ार यारो कि सहर के होते होते कई हम ने ख़्वाब देखे

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मुझे देखना हो जस को मिरे हाल पर न जाए मिरा ज़ौक़-ओ-शौक़ देखे मिरा इंतिख़ाब देखे


गुल-हनपैर रहे कि दरीदा - क़बा रहे जिस हाल में रहे तिरा नक़्श-ए-बका रहे


हम तो तमाम उम्र तिरी ही अदा रहे ये क्या हुआ कि फिर भी हमीं बेवफ़ा रहे


चाही जो तू ने बात वही बात हम ने की तेरी ज़बाँ बने तिरे दिल की सदा रहे


तू साथ साथ था तो ख़ुदाई भी साथ थी अपनी रफ़ाक़तों के निशाँ जा-ब-जा रहे


तुझ को भुला के भी न तुझे हम भला सके ना-आश्ना वो थे कि जहाँ आश्ना रहे


सब देखते थे फिर भी कोई देखता न था सब के लिए रसा थे मगर ना-रसा रहे


लब पर हो शिकवा - रेज़ तबस्सुम बुझा हुआ दिल में मगर किसी की मोहब्बत सिवा रहे


तस्वीर की तरह तिरी सूरत हो रू-ब-रू तस्वीर बन के कोई तुझे देखता रहे


दिल तंग हो तो वुसअत-ए-आलम भी तंग-तर दुनिया बहुत खुली है अगर दिल में जा रहे


लगते ही आँख रात के हंगामे सो गए जागे थे जितनी देर क़यामत बपा रहे


फूलों ने जा के सेज सज़ा पूरी रात काँटे चमन के सब मिरे दामन में आ रहे


ये जश्न-ए-ना-ख़ुदा है कि मौजों का रक्स कश्ती हो ग़र्क़-ए-आब मगर ना-ख़ुदा रहे


कहने को एक लफ़्ज़ मिरे पास है 'जमील' जब ले उड़े वो बात मिरे पास क्या रहे

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